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अरावली पर SC का बड़ा यू-टर्न! मोदी सरकार के ‘100 मीटर’ नियम पर लगी रोक, कांग्रेस ने क्या कहा? जानिए पूरी खबर

अरावली संरक्षण: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुरानी परिभाषा पर लगाई रोक

नई दिल्ली, 29 दिसंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में अरावली पहाड़ियों की परिभाषा से जुड़े अपने ही 20 नवंबर के आदेश पर रोक (Stay) लगा दी है। कोर्ट ने ‘100 मीटर ऊंचाई’ वाले विवादित नियम को ठंडे बस्ते में डालते हुए एक नई विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रस्ताव दिया है। कांग्रेस ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ‘उम्मीद की किरण’ बताया है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया: 'यह मोदी सरकार की साजिश की हार है'

कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला मोदी सरकार द्वारा अरावली को खनन माफियाओं के लिए खोलने की कोशिशों पर एक अस्थायी विराम है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश मोदी सरकार द्वारा थोपी जा रही अरावली की नई परिभाषा के खिलाफ एक उम्मीद की किरण है।"

कांग्रेस ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav के इस्तीफे की भी मांग की है। पार्टी का आरोप है कि मंत्रालय द्वारा सुझाई गई '100 मीटर' की परिभाषा वैज्ञानिक तथ्यों के खिलाफ थी और इसका एकमात्र उद्देश्य अरावली के 90% हिस्से को कानूनी संरक्षण से बाहर करना था।

क्या था विवादित ‘100 मीटर’ नियम?

सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के आदेश में अरावली पहाड़ी (Aravalli Hill) को परिभाषित करने के लिए एक नया पैमाना तय किया गया था। इसके तहत:

  • केवल उन्हीं पहाड़ियों को 'अरावली' माना जाएगा जिनकी ऊंचाई स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक हो।
  • इस परिभाषा के लागू होने से अरावली का एक बड़ा हिस्सा 'वन क्षेत्र' (Forest Area) की श्रेणी से बाहर हो जाता।
  • पर्यावरणविदों का दावा था कि इससे हरियाणा और राजस्थान में बड़े पैमाने पर Illegal Mining और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स का रास्ता साफ हो जाता।
  • सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बदली अपनी ही राय?

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) Surya Kant की अध्यक्षता वाली बेंच ने माना कि पिछली परिभाषा का गलत अर्थ निकाला जा रहा था। कोर्ट ने कहा कि अरावली की सुरक्षा के लिए एक निष्पक्ष और स्वतंत्र विशेषज्ञ राय (Independent Expert Opinion) की आवश्यकता है।

    बेंच ने स्पष्ट किया कि जब तक नई कमिटी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती, तब तक नवंबर 20 का आदेश स्थगित (Abeyance) रहेगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी।

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