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Shocking! Indian Rupee Hits All-Time Low Against Dollar – Your Wallet Will Feel This!

क्या आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है? आज, 12 दिसंबर 2025 को, भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है. कल्पना कीजिए, रुपये की कीमत 90.52 प्रति डॉलर हो गई है – ऐसा पहले कभी नहीं हुआ! ये सिर्फ एक नंबर नहीं है, दोस्तो, ये आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, आपके सपनों और भारत के भविष्य पर सीधा असर डालने वाला है.


क्यों गिर रहा है हमारा रुपया?


ये कोई अचानक हुई घटना नहीं है. कई कारणों का एक साथ आना है जिसने रुपये को इतना कमज़ोर कर दिया है. सबसे बड़ा कारण है **बढ़ता व्यापार घाटा (widening trade deficit)**. आसान भाषा में कहें तो, हम जितना सामान विदेश से खरीद रहे हैं (imports), उससे कहीं कम सामान बेच पा रहे हैं (exports). जब हम ज्यादा डॉलर खर्च करते हैं और कम कमाते हैं, तो डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है और हमारा रुपया कमज़ोर पड़ता है.

इसके अलावा, **अमेरिकी टैरिफ (US tariffs)** भी एक बड़ी वजह है. भारत के सामान पर अमेरिका ने 50% तक के भारी-भरकम टैरिफ लगाए हैं, जिससे हमारे निर्यात को तगड़ा झटका लगा है. बड़ी-बड़ी भारतीय कंपनियों की ओर से डॉलर की भारी मांग भी रुपये को नीचे खींच रही है.


आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?


अब बात करते हैं सबसे अहम सवाल की – इसका आप पर क्या असर होगा? सीधा जवाब है,  महंगाई (inflation) बढ़ सकती है!

महंगे होंगे imported सामान:अगर आप विदेश से आने वाले गैजेट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स (electronics), या यहाँ तक कि कुछ दवाइयां खरीदते हैं, तो अब उनके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. बाहर से आने वाला तेल भी महंगा होगा, जिसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और फिर सब्जियों से लेकर हर चीज़ पर दिख सकता है.
विदेश यात्रा और पढ़ाई होगी costly: अगर आप विदेश घूमने का प्लान कर रहे हैं या आपके बच्चे वहां पढ़ाई कर रहे हैं, तो अब आपको हर डॉलर के लिए ज्यादा रुपये देने पड़ेंगे. आपकी विदेश यात्रा का बजट (foreign travel budget) बढ़ जाएगा और बच्चों की फीस भी महंगी हो जाएगी.
निवेशकों के लिए चुनौती: भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) के लिए भी ये एक चुनौती है. विदेशी निवेशक (foreign investors) ऐसे माहौल में थोड़ा cautious हो सकते हैं, हालांकि घरेलू निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है.

RBI क्या कर रहा है?


भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इस स्थिति पर नज़र रखे हुए है. उनका काम रुपये की स्थिरता बनाए रखना है. RBI लचीलेपन और बाजार स्थिरता के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है.

आगे क्या?


यह एक जटिल स्थिति है, और रुपये का उतार-चढ़ाव वैश्विक और घरेलू दोनों कारकों पर निर्भर करेगा. सरकार और RBI के कदम, वैश्विक व्यापारिक संबंध और भारत का आर्थिक प्रदर्शन अगले कुछ महीनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

क्या आपको लगता है कि सरकार को और कदम उठाने चाहिए? इस बारे में आपकी क्या राय है? कमेंट्स में हमें बताएं!

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