भारत का 19 मिनट वायरल वीडियो डीपफेक का पर्दाफाश
भारत में '19 मिनट के वायरल वीडियो' का सच: डीपफेक और गलत सूचना का जाल
भारत में '19 मिनट के वायरल वीडियो' ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है, लेकिन यह डीपफेक और गलत पहचान का एक जटिल मामला निकला है, जिसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
भारत में '19 मिनट के वायरल वीडियो' का सच: डीपफेक और गलत सूचना का जाल
पिछले कुछ दिनों से, भारत के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर "19 मिनट का वायरल वीडियो" एक रहस्यमय और परेशान करने वाला ट्रेंड बन गया है। इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और टेलीग्राम पर यह 19 मिनट 34 सेकंड का कथित निजी वीडियो तेजी से फैला है, जिससे लाखों यूजर्स के बीच भ्रम, अफवाहें और गलत पहचान के मामले सामने आए हैं। हालांकि, गहन जांच और फैक्ट-चेक से पता चला है कि इस वीडियो के पीछे की सच्चाई कहीं अधिक जटिल और चिंताजनक है।
क्या है यह '19 मिनट का वायरल वीडियो'?
यह वीडियो एक कथित निजी MMS क्लिप है, जिसमें एक जोड़े को दिखाया गया है। यह क्लिप सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गई, जिससे जिज्ञासा और अटकलों का माहौल बन गया। यूजर्स ने इस वीडियो के लिंक खोजने शुरू कर दिए और इसे लेकर मीम्स और चुटकुलों की बाढ़ आ गई, जिससे यह ट्रेंड और भी व्यापक हो गया।
डीपफेक का खतरा और गलत पहचान
इस वायरल वीडियो के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण खुलासा यह है कि इसे बड़े पैमाने पर AI-जनरेटेड डीपफेक बताया जा रहा है। यह तकनीक वास्तविक दिखने वाले वीडियो बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करती है, जिससे सच्चाई और फिक्शन के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है।
इस मामले में, एक प्रसिद्ध इन्फ्लुएंसर, 'स्वीट जन्नत' को गलती से वीडियो में दिख रही महिला मान लिया गया। उनकी रीलों पर "19 मिनट्स?" जैसे कमेंट्स की बाढ़ आ गई, जिससे उन्हें बेवजह निशाना बनाया गया। स्वीट जन्नत ने खुद एक वीडियो जारी कर स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रही महिला वह नहीं हैं। उन्होंने लोगों से वीडियो को ध्यान से देखने और अपनी और वीडियो वाली लड़की की तुलना करने का आग्रह किया, यह बताते हुए कि वीडियो में लड़की अंग्रेजी बोल रही है जबकि उन्होंने मुश्किल से 12वीं पास की है।
आत्महत्या की झूठी अफवाहें
वीडियो के वायरल होने के साथ ही, इससे जुड़ी आत्महत्या की अफवाहें भी तेजी से फैलीं। कई पोस्ट में दावा किया गया कि वीडियो में दिख रही महिला ने शर्मिंदगी के कारण आत्महत्या कर ली है। हालांकि, फैक्ट-चेक से इन दावों का खंडन किया गया है। जांचकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि आत्महत्या के वीडियो में दिख रही महिला और 19 मिनट के एमएमएस वाली महिला अलग-अलग व्यक्ति हैं, और दोनों घटनाओं को जोड़ने का प्रयास केवल विचारों और जुड़ाव के लिए किया गया था।
कानूनी चेतावनी और डिजिटल युग की चुनौतियाँ
इस तरह के निजी और संभावित रूप से डीपफेक कंटेंट को साझा करने के गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अश्लील या AI-जनरेटेड कंटेंट साझा करने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67, 67A और 66 के तहत 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
यह घटना डिजिटल युग में गोपनीयता, संवेदनशीलता और ऑनलाइन गलत सूचना के तेजी से फैलने के खतरों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह दिखाता है कि कैसे किसी की निजी जिंदगी एक क्लिक में पूरी तरह से उजागर हो सकती है, और कैसे समाज की भीड़ संवेदनहीनता के चरम पर पहुंच सकती है। जनता से अनुरोध है कि वे किसी भी वीडियो या पोस्ट को साझा करने से पहले सत्यापित स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें और अफवाहों तथा असत्यापित वीडियो को फैलाने से बचें।
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